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                                                                                                                              SUNDAY SERMONS  FOR PERSONAL DEVOTION.

🎉 ईश्वर की स्थिरता का उत्सव: प्रेरक प्रवचन

पाठ: "और मैं तुझसे कहता हूँ कि तू पेत्रुस है, और इस चट्टान पर मैं अपनी कलीसा बनाऊँगा, और मृत्यु के द्वार उसका प्रतिरोध न कर सकेंगे।" — मत्ती 16:18

थीम: ईश्वर की निष्ठा को स्मरण करना, उसके आशीषों का उत्सव मनाना, और उसके मिशन के प्रति पुनःसमर्पण करना ✨

प्रस्तावना

प्रिय भाइयों और बहनों, आश्रितों और अतिथिगण,

आज हम एक पवित्र अवसर पर एकत्र हुए हैं—यह अवसर केवल तिथियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की अनवरत निष्ठा का साक्ष्य है। जब यीशु ने पेत्रुस से कहा, "मैं अपनी कलीसा बनाऊँगा," तो वे केवल किसी संस्था के बारे में नहीं कह रहे थे, बल्कि उस अनंत उद्देश्य के बारे में बोल रहे थे जो हर परिस्थिति में कायम रहेगा। आज हम यही सत्य मनाते हैं कि हम ईश्वर की उस कलीसा का हिस्सा हैं — एक जीवित उद्देश्य जिसमें ईश्वर की शक्ति और सत्य अंकित हैं।

I. वर्षों से ईश्वर की निष्ठा को स्मरण करना

स्मृति का आधार

भजन संहिता कहती है (भजन 77:11-12), "मैं यहोवा के कार्यों को स्मरण करूँगा; हाँ, मैं तेरी प्राचीन चमत्कारों को याद करूँगा।" हमारी आस्था की नींव स्मृति से बनती है। जैसे यिशराएलियों ने जोर्डन नदी पार करने के बाद स्मारक पत्थर खड़े किए (योशू 4), वैसे ही हमें भी उन अनगिनत क्षणों को याद करना चाहिए जिनमें ईश्वर ने हमें छुड़ाया, पोषित किया और मार्गदर्शन दिया।

हर मौसम में ईश्वर की व्यवस्था

  • आर्थिक आवश्यकताओं में ईश्वर की व्यवस्था (फिलिप्पियों 4:19): "और मेरा परमेश्वर तुम्हारी प्रत्येक आवश्यकता को अपनी महिमा के अनुसार पूरा करेगा।"
  • आध्यात्मिक वृद्धि (1 कुरिन्थियों 3:6-7): "मैंने बोया, अपोलो ने सींचा, पर बढ़ने वाला ईश्वर है।"
  • सुरक्षा और नेतृत्व (भजन 121:7-8): "यहोवा तुझे किसी भी विपत्ति से बचाएगा।"

व्यक्तिगत साक्ष्य

हर व्यक्ति की कहानी—परिवारों का पुनर्निर्माण, युवाओं का परिवर्तन, वृद्धों का सांत्वना—यह सब दर्शाता है कि हम मनुष्य की उपलब्धियों का उत्सव नहीं मना रहे, बल्कि ईश्वर की कृपा और विश्वासयोग्य कार्यों की स्तुति कर रहे हैं।

II. वर्तमान आशीषों का उत्सव

समुदाय का वरदान

इब्रानियों 10:24-25 हमें प्रेरित करता है कि हम एक-दूसरे को प्रेम और अच्छे कर्मों में प्रेरित करें और मिलन त्याग न करें। आज के समय में जहाँ अलगाव बढ़ रहा है, समुदाय—सच्चा, देखभाल करने वाला परिवार—एक अनमोल उपहार है।

  • विविधता में एकता: प्रकाशितवाक्य 7:9 के अनुसार हर जनजाति और भाषा का मिलन प्रभु के राज्य की झलक है।
  • अंतरपीढ़ीय सम्बन्ध: बुजुर्गों की बुद्धि और युवाओं की ऊर्जा का मेल समुदाय को समृद्ध बनाता है (भजन 145:4)।

सेवा का सौभाग्य

याकूब 1:17 कहता है कि हर उत्तम और परिपूर्ण उपहार ऊपर से आता है। इस समुदाय को दिया गया एक बड़ा उपहार है सेवा का अवसर—जीवित विश्वास को क्रियाशील रूप में प्रस्तुत करने का अवसर।

  • खोए हुए लोगों तक पहुंचना: लूका 15:7 में स्वर्गीय आनंद का वर्णन है जब एक पापी पश्चाताप करता है।
  • आवश्यकता में सहायता: मत्ती 25:40 के आधार पर, जो भी हम जरूरतमंदों के लिए करते हैं वह यहीं प्रभु के लिए किया जाता है।
  • शिष्यों का निर्माण: महान आदेश (मत्ती 28:19-20) का अनुपालन—नवीन विश्वासियों को पवित्र होने और सिखाने का कार्य।

परमेश्वर के वचन की प्रधानता

भजन 119:105 — "तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक और मेरे पथ के लिए प्रकाश है।" शास्त्र जीवन और मार्गदर्शन का स्त्रोत है; यह न केवल सीख देता है, बल्कि परिवर्तन भी लाता है (यशायाह 55:11)।

III. ईश्वर द्वारा हमें दिया गया मिशन

महान आदेश की याद

यीशु का आदेश (मत्ती 28:18-20) आज भी हमारा मार्गदर्शक है: "जाओ और सब जातियों में शिष्य बनाओ।" हमारा उद्देश्य केवल भीतरी विकास तक सीमित नहीं है; हमें बाहर जाकर सुसमाचार फैलाना है—प्रकटीकरण कार्य जैसा (प्रेरितों के काम 8:4)।

मेल-मिलाप का मंत्रालय

2 कुरिन्थियों 5:18-20 बताता है कि हमें मेल-मिलाप का मंत्रालय दिया गया है—हम मसीह के जरिये दूत हैं। यह कार्य तीन स्तरों पर होता है:

  • ऊर्ध्वाधर मेल-मिलाप: लोगों को परमेश्वर के साथ शांति दिलाना।
  • पारस्परिक मेल-मिलाप: व्यक्तियों और समुदायों के बीच क्षतिपूर्ति और सुधार।
  • सामाजिक मेल-मिलाप: अन्याय के खिलाफ खड़े होना और सचेत सामजिक प्रेम का प्रदर्शन।

पवित्रता का आह्वान

1 पतरस 2:9 हमें याद दिलाता है कि हम चुने हुए लोग हैं, एक राजसी पुरोहिती। यह हमारे आचार-व्यवहार और समाज के प्रति दृष्टिकोण को प्रभावित करता है—हमें अंत:करण से नम्र, सत्यपरक और प्रेमपूर्ण होना चाहिए (मत्ती 5:13-16)।

IV. भविष्य के प्रति पुनःसमर्पण

बाइबिल के उदाहरणों से सीखना

  • जोशू का आह्वान (जोशू 24:15): "तुम आज चुनो किसको पालन करोगे... पर मैं और मेरा घर यहोवा की सेवा करेंगे।" आवधिक नवीनीकरण आवश्यक है।
  • नीहमीय की सुधार प्रक्रिया: संकल्पों का सार्वजनिक और प्रतिबद्ध रूप ने उनके लोगों को पुनर्गठित किया (नीहमीय 10)।
  • दाऊद की भेंट: 1 इतिहास 29 में दाऊद का उदार नेतृत्व सामूहिक दान को प्रेरित करता है।

आज हमारा प्रतिज्ञान

हम यह निश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं कि:

  1. निष्ठापूर्वक उपासना: (इब्रानियों 12:28) ईश्वर को भय-भक्ति के साथ उपासना करें।
  2. उदार Stewardship: (मलाकी 3:10) तिथियों, उपहारों, समय और प्रतिभाओं के माध्यम से समर्थन।
  3. सक्रिय सुसमाचार: (रोमियों 1:16) सुसमाचार का शान न खोते हुए प्रेमपूर्वक साझा करना।
  4. सतत् विकास: (2 पतरस 3:18) अनवरत रूप से अनुग्रह और ज्ञान में बढ़ना।

V. विश्वास के साथ भविष्य की ओर देखना

ईश्वर की वादे

यिर्मयाह 29:11 — "मैं जानता हूँ कि जो योजनाएँ मैंने तुम्हारे लिए सोच रखी हैं..." यह वादा हमें आशा देता है।

  • उपस्थित का वादा: मत्ती 28:20 — "मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ।"
  • व्यवस्था का वादा: फिलिप्पियों 4:19 — "मेरे परमेश्वर तुम्हारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा।"
  • उद्देश्य का वादा: रोमियों 8:28 — "सब बातों में वे लोग जो उसे प्रेम करते हैं, उनको भला ही करते हैं।"

परिवर्तन को अपनाना, सत्य को बनाए रखना

सभोपदेशक 3:1 कहता है कि समय-समय का निर्धारण है। हमें अपनी विधियों में नवीनता लानी चाहिए परन्तु सुसमाचार के मूल सिद्धांतों में कठोर रहना चाहिए (गलातियों 1:8-9)। पॉल की तरह, हम लोगों तक पहुँचने के लिए विविधता में अनुकूलित हो सकते हैं पर सन्देश अपरिवर्तनीय रहेगा (1 कुरिन्थियों 9:22)।

समापन: सर्वश्रेष्ठ अभी बाकी है

प्रिय बंधुओ और भगिनियों, जैसे हम इस अवसर को मनाते हैं, हमारा हृदय कृतज्ञता से भरा हुआ है, हमारी दृष्टि आशा से भरपूर है, और हमारी निष्ठा सेवा के लिए नवीनीकृत है। इतिहास में जो कुछ भी हुआ—ईश्वर की निष्ठा का ही फल था। भविष्य में भी वही ईश्वर हमारे साथ रहेगा; वही मार्गदर्शन करेगा; वही हमारी सामर्थ्य बनेगा।

इफिसियों 3:20-21 के शब्दों के साथ समापन करते हैं: "अब वह, जो हमारी चाह से भी अधिक, वह सब कुछ कर सकता है... उसी का महिमा हो..." हमारी सबसे अच्छी उपलब्धियां पीछे नहीं हैं—वे हमारे आगे हैं। परमेश्वर की महिमा के लिए, हम तत्परता से आगे बढ़ें।

आइए आशीर्वाद लेकर निकलें: "परमेश्वर आशा का पिता तुम्हें सभी आनन्द और शांति से भर दे जब तुम परमेश्वर पर विश्वास करते हो ताकि तुम आशा से परिपूर्ण हो सको।" (रोमियों 15:13) और "येसु मसीह की अनुग्रह, परमेश्वर का प्रेम और पवित्र आत्मा की संगति सदा तुम्हारे साथ रहे।" (2 कुरिन्थियों 13:14)

"क्योंकि कोई भी कोई और नींव नहीं रख सकता सिवाय उसी के जो रखी गयी है — येसु मसीह।" — 1 कुरिन्थियों 3:11

ईश्वर का धन्यवाद और आशीर्वाद सदैव आप सबके साथ रहे। 🤍








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